एम्स ऋषिकेश ने उत्तराखंड में पहले लीवर ट्रांसप्लांट को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। जटिलतम शल्य चिकित्सा प्रक्रिया गुरुवार रात नौ बजे शुरू हुई। जो करीब 13 घंटे तक चली। वहीं, संस्थान में बीते तीन वर्षों में 23 वें व्यक्ति को सफलतापूर्वक किडनी प्रत्यारोपण किया गया। बीते 21 अप्रैल को सड़क दुर्घटना के एक 23 वर्षीय युवती गंभीर रूप से घायल हो गई थी। जिसे उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान युवती को चिकित्सकीय टीम ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद एम्स के चिकित्सकों ने युवती के स्वजन को युवती के आर्गेन जरूरतमंद लोगों को दान कर उन्हें नया जीवन देने के लिए प्रेरित किया।
चिकित्सकों के परामर्श के बाद जवान बेटी को खो चुके स्वजन ने मौत से जूझ रहे किसी व्यक्ति को जिंदगी देने का फैसला किया।युवती के परिजनों के इस निर्णय से जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे तीन लोगों को नई जिंदगी मिल गई। चिकित्सकों की टीम ने युवती को ब्रेन डेड घोषित करने के बाद लंबे अरसे से किडनी की बीमारी से जूझ रहे दो लोगों को युवती की दोनों किडनी और लीवर की बीमारी से जूझ रहे एक अन्य व्यक्ति को एम्स, ऋषिकेश में पहली बार लीवर ट्रांसप्लांट कर नया जीवन दिया गया। यह दोनों जटिल शल्य चिकित्सा प्रक्रिया एक साथ चली और पूरी तरह से सफल रही। जबकि एक व्यक्ति को अंग प्रत्यारोपण दिल्ली एम्स में किया गया। कार्यकारी निदेशक एम्स प्रोफेसर मीनू सिंह ने बताया कि पहली बार संस्थान में सफलतापूर्वक पहला लीवर ट्रांसप्लांट को अंजाम दिया गया।
बताया कि नेशनल आर्गेन एंड टिसु ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (नोटो) की सहायता से आर्गेन डोनेशन के लिए जरूरतमंद मरीजों का पता लगाया गया और इसके बाद नोटो के तहत अंग दान के लिए आवंटित किए गए। गुरुवार रात करीब नौ बजे अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया शुरू की गई। जिसमें एम्स संस्थान के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने हिस्सा लिया। 13 घंटे यानि शुक्रवार सुबह 10 बजे तक यह प्रक्रिया चली। इस कार्य को संस्थान के एक ही ओटी कांप्लेक्स में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। अंग प्रत्यारोपण को लेकर अहमदाबाद के वरिष्ठ चिकित्सक डा. प्रांजल मोदी के मार्गदर्शन में एम्स अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर डा. बी. सत्यश्री, संस्थान के डा. कर्मवीर सिंह, डा. रजनीश अरोड़ा, डा. वाईएस पयाल, डा. अंकुर मित्तल, डा. विकास पंवार, डा. रोहित गुप्ता, डा. आनंद शर्मा, डा. कल्याणी, डा. शैरोन कंडारी, डा. भारती, डा. भारत भूषण भारद्वाज, डा. सारंग भारती आदि ने इस प्रकिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
ग्रीन कारिडोर के माध्यम से डोनेट की गई एक किडनी और पेनक्रियाज को किसी जरूरतमंद मरीज को प्रत्यारोपित करने के लिए गुरुवार रात में ही दिल्ली, एम्स को भेजा गया है। बताया गया है कि एम्स दिल्ली को भेजे गए अंगों का भी प्रत्यारोपण पूरी तरह से सफल रहा। सफलता का यह पहला पायदान है, एम्स संस्थान इस दिशा में आगे तीव्र गति से कार्य करते हुए उत्तराखंड के लोगों की चिकित्सा सेवा का कार्य करेगा। इसके साथ ही उन्हें अंगदान को लेकर जागरूक भी किया जाएगा। जिससे स्थानीय स्तर पर लोग स्वैच्छिक तौर पर अंगदान प्रत्यारोपण के लिए आगे आने को प्रेरित हों और इस कार्य में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले सकें। पूरी टीम ने अच्छा काम किया। प्रो0 मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक, एम्स ऋषिकेश



