पिथौरागढ़ के मुनस्यारी-मिलम सड़क बंद, जोहार घाटी के 13 गांव पड़े अलग-थलग सेना की आवाजाही भी बंद

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चीन सीमा के साथ ही जोहार घाटी के 13 गांवों को जोड़ने वाली मुनस्यारी-मिलम सड़क बंद हो गई है। बोल्डर गिरने से सड़क पर आवाजाही पूरी तरह से ठप है। ऐसे में सेना के लिए चीन सीमा पर स्थित चौकियों पर और माइग्रेशन वाले ग्रामीणों के लिए अपने पैतृक गांवों में पहुंचना कठिन हो गया है। जगह-जगह ग्रामीण और सैनिक फंसे हुए हैं।

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मुनस्यारी-मिलम सड़क से होकर सेना और आईटीबीपी के जवान चीन सीमा पर स्थित चौकियों पर जबकि जोहार घाटी के 13 गांवों के ग्रामीण माइग्रेशन से लौटकर अपने पैतृक गांवों में पहुंचते हैं। बीते शुक्रवार की देर शाम रेलगाड़ी और लीलम के बीच पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर गिरने से यह सड़क बंद हो गई। ऐसे में जोहार घाटी के गांवों के साथ सेना की चौकियों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट गया।सेना के वाहनों की आवाजाही ठप होने से सैनिकों के लिए अपनी चौकियों में पहुंचना जबकि ग्रामीणों के लिए अपने मवेशियों के साथ पैतृक गांवों में पहुंचना मुश्किल हो गया है। सड़क बंद होने से सेना के साथ ही गांवों में सप्लाई ठप हो गई है। बोल्डर की चपेट में आने से लंबे समय से सड़क पर खड़ा राठी कंपनी का पुराना वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया है।

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जोहार घाटी में निजी और सरकारी निर्माण कार्य चल रहे हैं। सड़क बंद होने से निर्माण सामग्री की सप्लाई भी नहीं पहुंच पा रही है जिस कारण निर्माण कार्य रोकने पड़े हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि बोल्डरों को जल्द हटाना आसान नहीं है। ऐसे में सड़क को खोलने में दो से तीन दिन का समय लग सकता है। यदि जल्द सड़क नहीं खुली तो सेना के साथ माइग्रेशन से लौटने वाले 200 से अधिक ग्रामीणों की दिक्कत बढ़ सकती हैं।

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जानकारी के मुताबिक कुछ समय पहले तक मुनस्यारी-मिलम सड़क बीआरओ की 83 आरसीसी के अधीन थी। आरसीसी को छत्तीसगढ़ भेजने के बाद यह सड़क बीसीसी को हस्तांतरित होनी थी। अब तक सड़क का हस्तांतरण नहीं हो सका है। ऐसे में सड़क कौन खोलेगा, फिलहाल इसका पता नहीं है। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी बीआरओ की तरफ से सड़क को खुलवाने की बात कर रहे हैं।

मिलम सड़क जोहार घाटी के बूर्फू, मापा, रिलकोट, टोला, मर्तोली, पाछू, गनघर, ल्वां, लास्पा, बिल्जू, मिलम सहित 13 गांवों तक आवाजाही का एकमात्र जरिया है। मानसूनकाल से पूर्व इन गांवों तक इसी सड़क से तीन से चार महीने का राशन भेजा जाता है ताकि ग्रामीणों को कोई दिक्कत न हो। कुछ गांवों में तो राशन पहुंच चुका है लेकिन कुछ में अब भी खाद्यान्न सामग्री पहुंचाना शेष है। मानसून ने दस्तक दे दी है। ऐसे में यदि लंबे समय तक सड़क नहीं खुली तो बारिश के बीच इन गांवों में पैदल सफर कर राशन सहित अन्य जरूरी सामान पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।

बीआरओ से सड़क खोलने को लेकर वार्ता हो चुकी है। बोल्डरों को हटाने में समय लग सकता है, ऐसा बीआरओ की तरफ से बताया गया है। सड़क को जल्द खोलने के प्रयास हो रहे हैं। ।          आशीष जोशी, एसडीएम, मुनस्यारी

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