चमोली के नगर क्षेत्र और इसके आसपास के जंगलों में रविवार रात एक बार फिर आग धधक उठी। आग इतनी विकराल थी कि सोमवार दिनभर इससे धुआं उठता रहा। आग से वन संपदा को काफी नुकसान पहुंचा है। बद्रीनाथ राजमार्ग से लगे शक्तिनगर, राजनगर के शीर्ष पर जल संस्थान के पेयजल टैंक के पास से सुलगी आग बाबा आश्रम से लगे सिविल क्षेत्र के जंगल तक पहुंच गई। इससे आवासीय भवनों में रहने वाले लोगों और उमा माहेश्वर आश्रम के संत और यहां ठहरे लोगों को रातभर जागकर काटनी पड़ी। उमा माहेश्वर आश्रम के महंत ऐश्वर्यनाथ ने बताया कि बीते सप्ताह ही लगी आग से उनकी दो पानी की टंकियां और पाइप लाइनों को नुकसान पहुंचा था और फिर से लगी आग से इस बार विशालकाय चीड़ के पेडों को नुकसान पहुंचा है।
वहीं वन क्षेत्राधिकारी हेमंत बिष्ट ने बताया कि सिविल क्षेत्र के जंगल में लगी आग की सूचना महिला कर्मचारी सहित अन्य को समय पर दे दी गई थी, लेकिन रात में आग अधिक होने से इसे बुझाने में परेशानी आई। इसी तरह कनखुल क्षेत्र में भी सिविल वन भूमि में जंगल में आग की घटनाओं को रोकने में वन पंचायत और स्थानीय लोगों द्वारा समय पर जानकारी देने के बाद वन कर्मियों को भेजा गया। सिविल क्षेत्र में लोग झाड़ियों को आग के हवाले कर रहे हैं, जिससे बेकाबू आग जंगलों की ओर विकराल रूप ले रही है। ऐसे में वनाग्नि की घटनाओं को रोकने में सहयोग की जरूरत है।


