महान निशानेबाज पद्मश्री और एशियाई खेलों के स्वर्णिम सितारे जसपाल राणा का पार्थिव शरीर शुक्रवार देर शाम करीब पौने आठ बजे देहरादून स्थित उनके आवास पहुंचा। जैसे ही एंबुलेंस उनके घर पहुंची, पूरा माहौल गम और शोक में डूब गया। पौंधा क्षेत्र के मझोन गांव में हर तरफ रुदन, सिसकियों और चीखों की आवाजें सुनाई देने लगीं। घर के बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी।जसपाल राणा के पिता नारायण सिंह राणा बेटे को अंतिम बार देखकर खुद को संभाल नहीं पाए। उनकी आंखों से आंसुओं की धारा बहती रही और वह सिसकते हुए अपने पैरों पर भी ठीक से खड़े नहीं हो पा रहे थे। परिवार के अन्य सदस्य, रिश्तेदार, मित्र और गांववासी भी फफक-फफक कर रो पड़े। जिस गांव ने अपने बेटे को विश्व पटल पर भारत का गौरव बनते देखा था, आज उसी गांव की आंखें नम थीं।
रात करीब आठ बजे जसपाल राणा की शिष्या और ओलिंपिक पदक विजेता मनु भाकर भी मझोन गांव पहुंचीं। अपने गुरु के पार्थिव शरीर के सामने पहुंचते ही वह खुद को रोक नहीं सकीं और फूट-फूटकर रोने लगीं। गमगीन मनु भाकर की आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। भावुक होकर उन्होंने केवल इतना कहा कि ‘मेरा पिता समान गुरु चला गया।’ मनु ने कहा कि वह जो कुछ भी हैं जसपाल सर की बदौलत हैं। उन्होंने अनुशासन और जुनून का संतुलन बनाकर आगे बढ़ने की सीख दी। जसपाल राणा के अंतिम दर्शन के लिए भारतीय निशानेबाजी जगत के कई बड़े नाम भी देहरादून पहुंचे। पेरिस ओलिंपिक 2024 में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने वाले स्वप्निल कुसाले भी अपने गुरु और प्रेरणास्रोत को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। वहीं ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता सरबजोत सिंह ने भी मझोन गांव पहुंचकर जसपाल राणा को अंतिम प्रणाम किया। देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित करने वाले इन खिलाड़ियों के चेहरे पर गहरा दुख साफ दिखाई दे रहा था। हर कोई उस गुरु को याद कर रहा था जिसने भारतीय शूटिंग को नई ऊंचाइयां दीं।
देहरादून के रायपुर स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज में इन दिनों राष्ट्रीय निशानेबाजी शिविर चल रहा है, जिसमें देशभर के शीर्ष खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। लेकिन जसपाल राणा के निधन की खबर ने पूरे कैंप को शोक में डुबो दिया। शुक्रवार को निर्धारित ट्रायल नहीं हो सके। खिलाड़ी मानसिक रूप से बेहद व्यथित थे। देर शाम जैसे ही पार्थिव शरीर देहरादून पहुंचा, कैंप में मौजूद कई खिलाड़ी सीधे उनके आवास पहुंच गए और श्रद्धांजलि अर्पित की। जसपाल राणा के आवास पर देर रात तक लोगों का तांता लगा रहा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उनके घर पहुंचे और स्वजन से मुलाकात कर शोक संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने जसपाल राणा के निधन को देश और उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि जसपाल राणा की उपलब्धियों और उनका जज्बा हमेशा युवाओं को प्रेरणा देता रहेगा। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी, कैबिनेट मंत्री खजान दास, विधायक सहदेव सिंह पुंडीर सहित कई जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और खेल जगत की हस्तियां श्रद्धांजलि देने पहुंचीं।
जसपाल राणा का पार्थिव शरीर शनिवार सुबह 10 बजे तक देहरादून स्थित उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद पार्थिव शरीर को वाराणसी ले जाया जाएगा, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। परिवार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भगवान शिव और मां गंगा के प्रति उनकी गहरी आस्था थी। उन्होंने जीवनकाल में इच्छा जताई थी कि अंतिम संस्कार वाराणसी में हो। अब उसी इच्छा के अनुरूप उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।



