इनकम टैक्स के टारगेट पर उत्तराखंड के कई कॉपरेटिव बैंक, बड़े एक्शन की तैयारी
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Mar 19, 2026 10:22
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उत्तराखंड के चार शहरों में मौजूद कॉपरेटिव बैंकों पर इनकम टैक्स विभाग भारी भरकम पेनल्टी लगाने की तैयारी कर रहा है, इन बैंकों ने आईटी डिपार्टमेंट से सै...
उत्तराखंड के चार शहरों में मौजूद कॉपरेटिव बैंकों पर इनकम टैक्स विभाग भारी भरकम पेनल्टी लगाने की तैयारी कर रहा है, इन बैंकों ने आईटी डिपार्टमेंट से सैकड़ों करोड़ रुपए के ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड छुपाए हैं, जिसकी जांच के बाद ये पूरी गड़बड़ी सामने आई है, उत्तराखंड में सहकारी बैंकों की कार्यप्रणाली पर अब आयकर विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है, प्रदेश के चार शहरों में संचालित कॉपरेटिव बैंकों पर भारी भरकम पेनल्टी लगाने की तैयारी चल रही है, मामला करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन की जानकारी छुपाने और गलत रिपोर्टिंग से जुड़ा है, जिसने बैंकिंग सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल आयकर विभाग को लंबे समय से इन बैंकों की रिपोर्टिंग को लेकर संदेह था, इसी के चलते विभाग ने उत्तरकाशी, कोटद्वार और काशीपुर में स्थित सहकारी बैंकों में सर्वे और जांच अभियान चलाया, जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने विभाग के अधिकारियों को भी चौंका दिया, जांच में पाया गया कि इन बैंकों ने सैकड़ों करोड़ रुपये के ऐसे ट्रांजैक्शन की जानकारी आयकर विभाग को नहीं दी, जिनकी रिपोर्टिंग नियमानुसार अनिवार्य होती है, जांच में खुलासा हुआ कि उत्तरकाशी, कोटद्वार और काशीपुर के बैंकों द्वारा करीब 800 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन पूरी तरह से छुपाए गए, इसके अलावा लगभग 400 करोड़ रुपये के लेन-देन की जानकारी गलत तरीके से प्रस्तुत की गई. जिसके चलते आयकर विभाग तक सही आंकड़े नहीं पहुंच पाए, इस तरह कुल मिलाकर करीब 1200 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन की जानकारी या तो छुपाई गई या फिर गलत दी गई।
बैंकों के लिए यह अनिवार्य होता है कि वे एक निश्चित सीमा से अधिक के वित्तीय लेन-देन की जानकारी आयकर विभाग को समय पर और सही तरीके से दें, इससे टैक्स चोरी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके, इस मामले में नियमों की अनदेखी साफ तौर पर सामने आई है, जिसे गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है, आयकर विभाग ने यह जांच पिछले चार वर्षों के दौरान हुए ट्रांजैक्शन के आधार पर की है, यह अवधि वित्तीय वर्ष 2021-22 से लेकर वर्तमान समय तक की है, जांच आयकर अधिनियम की धारा 133A के तहत की गई, जिसके अंतर्गत विभाग को सर्वे और दस्तावेजों की जांच का अधिकार होता है. इस दौरान विभागीय टीम ने बैंक रिकॉर्ड, खातों और रिपोर्टिंग सिस्टम की गहन जांच की, जांच के दौरान कई ऐसे बड़े ट्रांजैक्शन सामने आए, जिनकी जानकारी विभाग को बिल्कुल नहीं दी गई, इससे यह संकेत मिलता है कि या तो जानबूझकर जानकारी छुपाई गई या फिर रिपोर्टिंग सिस्टम में गंभीर खामियां हैं. दोनों ही स्थितियों में यह मामला दंडात्मक कार्रवाई के दायरे में आता है।
अब आयकर विभाग इन बैंकों पर भारी जुर्माना लगाने की तैयारी कर रहा है, पेनल्टी की राशि ट्रांजैक्शन की गंभीरता और नियमों के उल्लंघन के स्तर के आधार पर तय की जाएगी, माना जा रहा है कि यह जुर्माना काफी बड़ा हो सकता है, जिससे संबंधित बैंकों पर वित्तीय दबाव भी बढ़ेगा, उधर हरिद्वार स्थित जिला सहकारी बैंक भी आयकर विभाग के रडार पर है, यहां भी जांच की जा चुकी है, शुरुआती संकेतों में बड़े पैमाने पर अंडर रिपोर्टिंग की आशंका जताई जा रही है, सूत्रों का मानना है कि हरिद्वार में सामने आने वाले मामलों का दायरा उत्तरकाशी, कोटद्वार और काशीपुर से भी बड़ा हो सकता है। हालांकि, फिलहाल पेनल्टी की प्रक्रिया उत्तरकाशी, कोटद्वार और काशीपुर के बैंकों के खिलाफ ही शुरू की जा रही है, जैसे ही हरिद्वार की जांच पूरी होगी, वहां भी सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है, इस पूरे मामले ने सहकारी बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
इस तरह की कार्रवाई से भविष्य में बैंकों को अपनी रिपोर्टिंग प्रणाली मजबूत करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, साथ ही यह कदम अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए भी एक सख्त संदेश है कि नियमों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी, उत्तराखंड के सहकारी बैंकों पर आयकर विभाग की यह कार्रवाई न केवल वित्तीय अनियमितताओं पर शिकंजा कसने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि यह बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता और अनुशासन स्थापित करने की कोशिश भी है, आने वाले दिनों में हरिद्वार की जांच रिपोर्ट इस पूरे मामले को और बड़ा मोड़ दे सकती है।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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