हल्द्वानी: लोगों को मिलेगी पानी की समस्या से निजात, लगेंगे नए फिल्टर प्लांट और पेयजल लाइनें होंगी दुरुस्त
By सुरेन्द्र सिंह रावत
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Oct 13, 2024 04:36
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हल्द्वानी शहर में पेयजल की समस्या काफी गंभीर बन गई है, गर्मियों में पानी की सबसे ज्यादा किल्लत से लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है, ऐसे में अब जल संस्...
हल्द्वानी शहर में पेयजल की समस्या काफी गंभीर बन गई है, गर्मियों में पानी की सबसे ज्यादा किल्लत से लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है, ऐसे में अब जल संस्थान ने शहर में तीन नए फिल्टर प्लांट का निर्माण करने जा रहा है, जिसमें 26 एमएलडी क्षमता का एक नया प्लांट, जबकि 7.5 एमएलडी के पुराने प्लांट के जगह पर 12.5 एमएलडी के दो नए प्लांट बनाए जाएंगे, इसके लिये पेयजल निगम 160 करोड़ रुपए खर्च करने जा रहा है।
इसके अलावा 1972 में हल्द्वानी शहर में बिछी सीमेंट की पाइपलाइन भी बदली जाएगी, इसकी जगह लोहे की नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी, पेयजल निगम ने निविदाएं पूरी कर ली हैं, टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद 18 माह के भीतर कार्य को पूरा करने का लक्ष्य है, साथ ही 1970 में बने शीशमहल फिल्टर प्लांट को ध्वस्त किया जाएगा, बता दें कि हल्द्वानी शहर की लगातार जनसंख्या बढ़ रही है, जनसंख्या बढ़ने के साथ ही पानी की भी समस्याएं बढ़ रही है, शीशमहल स्थित फिल्टर प्लांट लगभग 60 साल पुराना है।
पुराने फिल्टर प्लांट से शहर की आधे से अधिक आबादी को पानी की आपूर्ति होती है, हल्द्वानी में आधे शहर में पेयजल लाइन करीब 40 से 50 साल पुराने हैं, जिस कारण लाइनें जर्जर हो चुकी हैं, सबसे अधिक लीकेज भी नैनीताल रोड की लाइनों से होता है, जिस कारण हजारों लीटर पानी सड़कों पर बर्बाद होता है, विभाग यहां बार-बार लीकेज बनाते रहता है, लेकिन बहुत पुरानी लाइनें होने के कारण फिर से लीकेज हो जाते है।
नए प्लांट की योजना में इन पुरानी जर्जर लाइनों को भी बदला जाएगा, जिलाधिकारी नैनीताल वंदना सिंह ने बताया कि फिल्टर प्लांट और पेयजल लाइन बिछाने के लिए दो बार टेंडर प्रक्रिया आमंत्रित की गई, लेकिन निर्माण करने वाली एजेंसी ने प्रतिभाग नहीं किया, तीसरी बार टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और कंपनी भी नामित हो गई है, जल्द ही बजट मिलने की उम्मीद है, कहा कि बजट मिलते हैं कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
सुरेन्द्र सिंह रावत
Verified Reporter
Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.
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