देहरादून

उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद हैडमास्टर विहीन होने की कगार पर हाईस्कूल, 910 हाईस्कूलों में से 905 में स्थायी प्रधानाध्यापक नहीं

सुरेन्द्र सिंह रावत By सुरेन्द्र सिंह रावत Oct 17, 2026 21:38 • 158 views • 0 Comments
उत्तराखंड राज्य निर्माण के बाद हैडमास्टर विहीन होने की कगार पर हाईस्कूल, 910 हाईस्कूलों में से 905 में स्थायी प्रधानाध्यापक नहीं

उत्तराखंड में शिक्षा विभाग की पदोन्नति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदेश के 910 राजकीय जूनियर हाईस्कूलों में से 905 में स्थायी प्रधानाध्यापक नहीं रह गए हैं। कार्यरत 37 प्रधानाध्यापकों में से 32 को प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति मिलने के बाद अब केवल पांच विद्यालयों में ही स्थायी प्रधानाध्यापक रह गए हैं। शेष विद्यालयों में वरिष्ठ शिक्षकों को अस्थायी रूप से कार्यभार सौंपा गया है। राज्य गठन के बाद यह पहली बार है, जब प्रदेश के जूनियर हाईस्कूल प्रधानाध्यापक विहीन होने की कगार पर पहुंच गए हैं। शिक्षकों ने इस स्थिति को अभूतपूर्व बताते शिक्षक संगठनों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।उनका कहना है कि वर्षों से पदोन्नतियां बाधित होने के कारण शिक्षा व्यवस्था का पदोन्नति ढांचा प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद रिक्त पदों को भरने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

उत्तराखंड राज्य शैक्षिक (अध्यापन संवर्ग) राजपत्रित सेवा नियमावली, 2022 के अनुसार, मौलिक रूप से नियुक्त सात वर्ष की निरंतर सेवा पूरी कर चुके प्रवक्ता और 12 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके एलटी शिक्षक प्रधानाध्यापक पद पर पदोन्नति के लिए अर्ह हैं। प्रधानाध्यापक के पद शत-प्रतिशत पदोन्नति से भरे जाने का प्रविधान है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद कुमार सिमल्टी ने कहा कि विभाग की ओर से पदोन्नति प्रक्रिया पर मंथन चल रहा है। मंजूरी मिलते ही प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। शिक्षक नेता रविंद्र राणा ने कहा कहा कि प्रदेश में प्रधानाचार्य के 1385 स्वीकृत पदों में से 90 प्रतिशत से अधिक रिक्त हैं। वहीं, एलटी से प्रवक्ता पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया भी पिछले आठ वर्षों से बाधित है। वर्तमान में पदोन्नति में कोई बड़ी बाधा नहीं है। सरकार और विभाग के शीर्ष स्तर पर नीतिगत निर्णय लेकर सभी संवर्गों में पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

सुरेन्द्र सिंह रावत

सुरेन्द्र सिंह रावत

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Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.

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