उत्तराखंड

उत्तराखंड के प्राइमरी स्कूलों में अब 'पंचकोष विकास सिद्धांत' से पढ़ेंगे बच्चे, SCERT ने दी हरी झंडी

सुरेन्द्र सिंह रावत By सुरेन्द्र सिंह रावत Feb 03, 2026 03:51 1 views 0 Comments
उत्तराखंड के प्राइमरी स्कूलों में अब 'पंचकोष विकास सिद्धांत' से पढ़ेंगे बच्चे, SCERT ने दी हरी झंडी

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप उत्तराखंड में प्रारंभिक शिक्षा को अधिक समग्र, व्यावहारिक और बाल-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गय...

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप उत्तराखंड में प्रारंभिक शिक्षा को अधिक समग्र, व्यावहारिक और बाल-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने कक्षा पांचवीं तक के नौनिहालों के लिए राज्य पाठ्यचर्या में पंचकोष विकास सिद्धांत को शामिल करने की अनुशंसा की है। इसका उद्देश्य तीन से आठ वर्ष के बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है।एससीईआरटी की ओर से तैयार की गई बुनियादी स्तर (फाउंडेशन स्टेज) की राज्य पाठ्यचर्या रूपरेखा (एससीएफ) राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के मार्गदर्शन में विकसित की गई है।

इसमें उत्तराखंड की भाषाई, सांस्कृतिक और भौगोलिक विशिष्टताओं को विशेष रूप से शामिल किया गया है, ताकि शिक्षा बच्चों के परिवेश से जुड़ी और अर्थपूर्ण बन सके। यह पाठ्यचर्या मुख्य रूप से तीन से आठ वर्ष की आयु के बच्चों के सीखने और विकास पर केंद्रित है। इसमें रटंत शिक्षा के स्थान पर अनुभवात्मक, गतिविधि आधारित और खेल-खेल में सीखने को प्राथमिकता दी गई है। बच्चों की जिज्ञासा, कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय कहानियों, लोकसंस्कृति, खेलों और दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है।

एससीईआरटी के राज्य समन्वयक रविदर्शन तोपाल ने बताया कि कि इस नई व्यवस्था से बच्चों पर शैक्षणिक दबाव कम होगा और वे स्वाभाविक रूप से सीखने की प्रक्रिया से जुड़ेंगे। आने वाले समय में शिक्षकों के प्रशिक्षण, शिक्षण सामग्री और मूल्यांकन पद्धति में भी इसी दर्शन के अनुरूप बदलाव किए जाएंगे। राज्य में 11,580 प्राथमिक विद्यालयों में तीन लाख से अधिक विद्यार्थी हैं।

पंचकोष में

  • अन्नमय कोष : इसके अंतर्गत शारीरिक विकास और पोषण पर जोर दिया गया है। ताकि स्वस्थ शरीर पठन-पाठन में सहायक हो।
  • प्राणमय कोष: स्वास्थ्य, स्वच्छता और जीवन शक्ति को सुदृढ़ करने वाली गतिविधियां शामिल हैं। ताकि शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की ललक बनी रहे।
  • मनोमय कोष : बच्चों के भावनात्मक संतुलन, आत्मविश्वास और सामाजिक कौशल को विकसित करने पर केंद्रित है। इससे बच्चे समाज में होने वाले बदलाव को जान सकेंगे।
  • विज्ञानमय कोष : इसके माध्यम से सोचने-समझने, तर्क और बौद्धिक क्षमता को बढ़ाया जाएगा ताकि बच्चों की समझ ठोस बुनियाद पर विकसित हो और वे आगे की कक्षाओं के योग्य बन सकें।
  • आनंदमय कोष : इसमें नैतिक मूल्य, आत्मिक सुख और सकारात्मक दृष्टिकोण को विकसित किया जाएगा, ताकि छात्र राष्ट्रहित, परिवार एवं अन्य का सम्मान करने के भाव से आगे बढ़े।
सुरेन्द्र सिंह रावत

सुरेन्द्र सिंह रावत

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Professional journalist writing regular analytical and research reports on key political, cultural, and technological fields globally.

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