अल्मोड़ा विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष लोकेश सुप्याल ने लगभग तीन वर्षों से एस.एस.जे. कैंपस, अल्मोड़ा में नए भवन का निर्माण कार्य निरंतर चल रहा है तथा अनुमानतः यह कार्य आगामी दो वर्षों तक और चलेगा। उक्त निर्माण कार्य में लगे श्रमिक अन्य राज्यों से हैं, जो अपने पूरे परिवार सहित निर्माण स्थल के आसपास निवास कर रहे हैं। इनमें 2–3 वर्ष से लेकर 12–15 वर्ष तक के छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं। छात्र संघ अध्यक्ष का दायित्व संभालने के पश्चात जब मैंने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया, तब मुझे इन बच्चों की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त हुई। यह सर्वविदित है कि निर्माण स्थल जैसे जोखिमपूर्ण स्थानों पर बच्चों का रहना अथवा कार्य करना कानूनन निषिद्ध है।
यद्यपि मैं इस मानवीय पक्ष को समझता हूँ कि छोटे बच्चों को उनके माता-पिता से अलग नहीं किया जा सकता, परंतु यह प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण है कि इन बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा एवं भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा? जानकारी एकत्र करने पर यह तथ्य सामने आया कि— ये बच्चे विद्यालय नहीं जा रहे हैं,
• तथा कुछ बच्चों को निर्माण स्थल पर कार्य करते हुए भी पाया गया, जो कि बाल श्रम कानूनों के अंतर्गत दंडनीय अपराध है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आर.टी.ई.) का उल्लंघन है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है।
मैं आपको यह भी अवगत कराना चाहता हूँ कि मैंने चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) पर शिकायत दर्ज कराई, किंतु केवल संबंधित ठेकेदार को चेतावनी देकर प्रकरण समाप्त कर दिया गया तथा बच्चों की सुरक्षा एवं शिक्षा को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके अतिरिक्त, मैंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की, जिसके उपरांत स्थानीय पुलिस थाने से मुझे कॉल आया, परंतु वहाँ से भी कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। केवल यह कहकर बात समाप्त कर दी गई कि बच्चे माता-पिता के साथ ही रहेंगे, जबकि उनकी सुरक्षा, शिक्षा एवं भविष्य पर कोई विचार नहीं किया गया।
उपरोक्त सभी प्रयासों के पश्चात अब मैं अंतिम आशा एवं पूर्ण विश्वास के साथ आपके समक्ष यह प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर रहा हूँ। एक छात्र संघ अध्यक्ष होने के नाते मैं यह नहीं देख सकता कि मेरी आँखों के सामने इतने बच्चों का भविष्य अंधकार में चला जाए।
1. इस प्रकरण में तत्काल एवं प्रभावी कार्रवाई करने की कृपा करें।
2. निर्माण स्थल पर मौजूद सभी बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
3. किसी भी प्रकार के बाल श्रम को तुरंत रोका जाए।
4. शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत बच्चों की पढ़ाई की समुचित व्यवस्था कराई जाए।
5. संबंधित ठेकेदार एवं उत्तरदायी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।



