उत्तरकाशी जिले के बड़कोट क्षेत्र कोटि गगटाड़ी गांव के लसरी तोक में छानी में लगी आग से तीन महीने की बच्ची की जलकर मौत हो गई। ढाई वर्ष के बच्चे को बचा लिया गया। आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। छानी में बिजली का कनेक्शन नहीं था। हालांकि खाना बनाने के लिए चूल्हे का प्रयोग किया जाता था। उधर, बसराली गांव में जसपाल के लकड़ी के आवासीय भवन में शार्ट सर्किट से लगी आग से घर का सामान, आभूषण, बिस्तर व कपड़े आदि जल गए। परिवार के लोगों ने किसी तरह भागकर जान बचाई।
घटना रविवार शाम आठ बजे की है। शैलेंद्र सिंह चौहान के बगीचे की देखभाल करने वाले नेपाल मूल के मन बहादुर परिवार सहित उन्हीं की दो मंजिला छानी में रहते हैं। छानी में शाम को अचानक आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी भीषण थी कि पूरा भवन जल गया और परिवार को संभलने का मौका नहीं मिला। मन बहादुर अपनी पत्नी और ढाई साल के बच्चे को लेकर तो बाहर निकल आए लेकिन तीन महीने की रिया आग की लपटों में घिर गई। आग की सूचना मिलते ही राजस्व विभाग की टीम नायब तहसीलदार खजान असवाल के नेतृत्व में तत्काल मौके पर पहुंची। टीम द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है तथा आग लगने के कारणों की जांच जारी है।
फिलहाल आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में आग बुझाने के पर्याप्त संसाधन और त्वरित आपदा प्रबंधन व्यवस्था न होने के कारण ऐसे हादसों में नुकसान कई गुना बढ़ जाता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल राहत और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।



