अल्मोड़ा में उद्यानकर्मियों के लिए सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली पर एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित

अल्मोड़ा में भाकृअनुप –विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा (उत्तराखंड) द्वारा 12 फरवरी 2026 को “सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली” विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यशाला राष्ट्रीय कृषि विकास योजना – पर ड्रॉप मोर क्रॉप (RKVY–PDMC) के अंतर्गत मुख्य उद्यान अधिकारी, जनपद अल्मोड़ा के प्रायोजन से आयोजित की गई। कार्यक्रम में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उत्तराखंड सरकार के अधिकारियों/कार्मिकों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।

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कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में कार्यशाला समन्वयक डॉ0 उत्कर्ष कुमार ने कार्यशाला के उद्देश्य, इसकी प्रासंगिकता तथा सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के महत्व एवं लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली जल उपयोग दक्षता बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा फसल उत्पादकता में वृद्धि का प्रभावी माध्यम है। इस अवसर पर सुश्री ऋचा जोशी, वरिष्ठ उद्यान निरीक्षक, अल्मोड़ा ने “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना के अंतर्गत सूक्ष्म सिंचाई के महत्व को रेखांकित करते हुए अधिकारियों/ कार्मिकों को प्रेरित किया। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण में सक्रिय सहभागिता कर तकनीकी एवं व्यावहारिक ज्ञान अर्जित करें तथा इसे अपने-अपने विकासखंडों के विभिन्न गांवों के किसानों तक प्रभावी रूप से पहुंचाएं, ताकि योजना का लाभ अधिक से अधिक कृषकों को मिल सके।

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संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत ने अपने संबोधन में पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षाजल संचयन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि सीमित जल संसाधनों के प्रभावी एवं न्यायोचित उपयोग के लिए आधुनिक तकनीकों, जैसे मृदा आर्द्रता सेंसर का प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बागवानी आधारित खेती पर्वतीय कृषि प्रणाली की रीढ़ है तथा सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के समुचित उपयोग से जल संरक्षण के साथ-साथ उत्पादकता एवं किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

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कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में जल उपयोग दक्षता बढ़ाना, फसल उत्पादकता में सुधार लाना तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के प्रभावी क्रियान्वयन को प्रोत्साहित करना था। विशेषज्ञों द्वारा ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों की संरचना, स्थापना, संचालन एवं रखरखाव, लागत–लाभ विश्लेषण तथा विभिन्न बागवानी फसलों में इनके उपयोग पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

सत्रों के दौरान फर्टिगेशन तकनीक, जल संरक्षण उपाय तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान एवं प्रोत्साहनों की जानकारी भी साझा की गई। प्रतिभागियों को संस्थान के प्रायोगिक प्रक्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली का प्रत्यक्ष प्रदर्शन कराया गया, जिससे उन्हें तकनीकी पहलुओं की व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई। कार्यक्रम का संचालन संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. उत्कर्ष कुमार द्वारा किया गया, जबकि वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी श्री नारायण राम ने प्रतिभागियों को प्रायोगिक प्रक्षेत्र का भ्रमण कराते हुए सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की कार्यप्रणाली का विस्तृत प्रदर्शन कराया। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी, ज्ञानवर्धक एवं समयानुकूल बताया।

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